Friday, August 16, 2013
तेरी-वो-बात-ना-आई-है
Posted by Rahul Bhadani at 2:40 PM
राह देखते तेरी , शाम ढलने को आई है।
तेरे क़दमों के निशाँ मिटा भी ना पाई की रुश्बाई चली आई है,
आई है सूखी पंखुरियों की खुशबू,
बस तेरी याद आई है , तेरी परछाई ना आई है ,
बस तेरी याद आई है , तेरी परछाई ना आई है।
बंद करने पे आँखें, तेरी हर बात नज़र आई है ,
बिखरे ख्वाबों को समेटते , मेरी आँख भर आई है।
लायी है तेरी प्यार की चाहत ,
आई है दुआ तेरी , तेरी वो बात ना आई है,
आई है दुआ तेरी , तेरी वो बात ना आई है।
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